
Bihar बिहार: बिहार के एक व्यवहार न्यायालय में बुधवार को एक अलग और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार साइकिल से न्यायालय पहुंचे। उनका यह कदम सादगी, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। न्यायिक व्यवस्था से जुड़े इस प्रकार के व्यवहार ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।
Rajeev Ranjan Kumar बुधवार सुबह करीब सात बजे अपने आवास दानीबिगहा से साइकिल पर सवार होकर न्यायालय के लिए निकले। उनके साथ दो अंगरक्षक भी साइकिल पर मौजूद थे। उन्होंने लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय कर व्यवहार न्यायालय परिसर तक पहुंचकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।
इस दौरान न्यायालय के नाजीर आत्मानंद राय और कुछ अन्य कर्मचारी भी उनके साथ साइकिल पर सवार होकर कोर्ट पहुंचे। यह दृश्य शहर में चर्चा का विषय बन गया और लोगों ने इसे एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा।
Dhanibigha से शुरू हुई यह यात्रा न केवल एक साधारण आवागमन थी, बल्कि इसमें एक सामाजिक संदेश भी छिपा था। जज राजीव रंजन कुमार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत की दिशा में प्रेरणादायक माना जा रहा है।
न्यायालय परिसर पहुंचने पर भी उन्होंने सामान्य और सरल व्यवहार बनाए रखा। उनके इस कदम को देखकर वहां मौजूद लोग भी प्रेरित हुए और कई कर्मचारियों ने इसे एक सकारात्मक पहल बताया।
Judicial Court Complex में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। वकीलों और न्यायालय कर्मियों ने इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण बताते हुए कहा कि इस तरह के कदम समाज में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा इस तरह की पहल आम जनता को भी पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है। साइकिल का उपयोग न केवल प्रदूषण कम करता है बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है।
स्थानीय लोगों ने भी प्रधान जिला जज के इस कदम की सराहना की और कहा कि यह एक सकारात्मक संदेश है कि बड़े अधिकारी भी सरल जीवनशैली अपना सकते हैं। इससे समाज में एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत होता है।
न्यायालय के अंदर और बाहर इस घटना की चर्चा पूरे दिन बनी रही। कई लोगों ने इसे “मोटिवेशनल पहल” बताया और उम्मीद जताई कि इससे अन्य अधिकारी भी प्रेरित होंगे।





